लेखक: राम सैनी
गाँव: मतेया खास, जिला गोपालगंज, बिहार
बिहार के गोपालगंज जिले का छोटा-सा गाँव मतेया खास दिन में जितना शांत दिखाई देता है, रात होते ही उतना ही रहस्यमयी हो जाता है। गाँव के सरकारी स्कूल के पास स्थित पुराने पीपल के पेड़ को लेकर वर्षों से कई कहानियाँ सुनाई जाती हैं। गाँव के बुज़ुर्गों का कहना है कि आधी रात के बाद वहाँ एक रहस्यमयी औरत दिखाई देती है। यह कहानी उसी रहस्य पर आधारित एक काल्पनिक हॉरर स्टोरी है।
मतेया खास के स्कूल वाले पीपल का रहस्य
गाँव के सरकारी स्कूल के पास एक बहुत पुराना पीपल का पेड़ है। दिन में बच्चे उसके नीचे खेलते हैं, लेकिन रात होते ही पूरा इलाका सुनसान हो जाता है।
गाँव के बुज़ुर्ग हमेशा कहते थे—
"रात के 12 बजे के बाद स्कूल वाले पीपल के पास मत जाना।"
लोगों का दावा था कि वहाँ सफेद साड़ी पहने एक औरत दिखाई देती है जिसकी लाल आँखें अंधेरे में चमकती रहती हैं।
राम सैनी की जिज्ञासा
राम सैनी को बचपन से डरावनी कहानियाँ लिखने का शौक था। उन्होंने गाँव की इस रहस्यमयी कहानी की सच्चाई जानने का फैसला किया।
एक शाम वे अपने दोस्त पंकज के साथ स्कूल वाले पीपल के पास पहुँचे।
पीपल के पेड़ पर दिखाई दी रहस्यमयी औरत
सूरज डूब चुका था।
अचानक बिना हवा के पीपल की ऊँची डाल हिलने लगी।
दोनों ने ऊपर देखा...
उन्हें ऐसा लगा जैसे कोई लंबे बालों वाली औरत उन्हें घूर रही हो।
पंकज डरकर भाग गया।
लेकिन राम ने मोबाइल से उस पेड़ की फोटो खींच ली।
डरावनी फोटो और रहस्यमयी संदेश
घर पहुँचकर जब राम ने फोटो देखी तो उनके पीछे सफेद साड़ी पहने एक औरत खड़ी दिखाई दे रही थी।
उन्होंने फोटो डिलीट कर दी।
लेकिन फोटो फिर वापस आ गई।
उस पर लाल अक्षरों में लिखा था—
"सो जाओ... नहीं तो मैं आ जाऊँगी।"
आधी रात का पहला संदेश
रात के ठीक 12 बजे मोबाइल पर एक अनजान नंबर से संदेश आया—
"तुमने मुझे देख लिया है..."
राम ने पूछा—
"तुम कौन हो?"
उत्तर मिला—
"आज रात खिड़की मत खोलना..."
कमरे में शुरू हुआ डर का खेल
कुछ ही देर बाद पूरे घर की बिजली चली गई।
कमरा अंधेरे में डूब गया।
खिड़की के बाहर किसी औरत के रोने की आवाज़ आने लगी।
राम ने खिड़की खोली...
बाहर कोई नहीं था।
लेकिन शीशे पर दो लाल आँखें दिखाई दे रही थीं।
आईने में दिखी लाल आँखों वाली औरत
राम ने कमरे के आईने में देखा।
वहाँ वही औरत उसके पीछे खड़ी थी।
जब वह पीछे मुड़ा...
तो वहाँ कोई नहीं था।
लेकिन आईने में वह अब भी मुस्कुरा रही थी।
अचानक आईना अपने आप टूट गया।
मोबाइल कैमरे का डरावना सच
मोबाइल का कैमरा अपने आप चालू हो गया।
स्क्रीन पर वही औरत राम के बिल्कुल पीछे दिखाई दे रही थी।
जैसे-जैसे वह स्क्रीन देख रहे थे...
वह औरत और करीब आती जा रही थी।
पीपल के पेड़ के नीचे अंतिम सामना
डर के मारे राम घर से भागकर सीधे सरकारी स्कूल के पास वाले पीपल के पेड़ तक पहुँचे।
लेकिन वहाँ का नज़ारा और भी भयानक था।
पेड़ के नीचे दर्जनों लोग खड़े थे।
सभी के चेहरे काले थे।
एक-एक करके सभी गायब हो गए।
अब वहाँ सिर्फ वही लाल आँखों वाली औरत खड़ी थी।
उसने मुस्कुराकर कहा—
"अब तुम मेरी कहानी लिखोगे..."
रहस्यमयी गायब होना
अगली सुबह गाँव वालों को पीपल के पेड़ के नीचे राम की डायरी मिली।
लेकिन राम कहीं नहीं मिले।
डायरी के आखिरी पन्ने पर लिखा था—
"अगर तुम यह कहानी पढ़ रहे हो... तो आज रात 12 बजे स्कूल वाले पीपल के पास मत जाना।"
क्या यह सिर्फ एक कहानी है?
आज भी कुछ लोग दावा करते हैं कि आधी रात के बाद मतेया खास के सरकारी स्कूल के पास वाले पीपल से किसी औरत के रोने की आवाज़ आती है।
कुछ लोगों का कहना है कि उनके मोबाइल पर बिना किसी नंबर के सिर्फ एक संदेश आता है—
"सो जाओ... नहीं तो मैं आ जाऊँगी।"
क्या यह सिर्फ एक काल्पनिक कहानी है...
या इसके पीछे कोई अनसुलझा रहस्य छिपा है...
यह फैसला आप खुद कीजिए।
लेखक परिचय
राम सैनी के बारे में
राम सैनी बिहार के गोपालगंज जिले के मतेया खास गाँव के निवासी हैं। उन्हें रहस्य, रोमांच और हॉरर पर आधारित काल्पनिक कहानियाँ लिखने का विशेष शौक है। उनकी कहानियाँ लोककथाओं और कल्पना का मिश्रण हैं और केवल मनोरंजन के उद्देश्य से लिखी जाती हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer)
8PM Bihar Tak पर प्रकाशित यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक (Fiction) है और केवल मनोरंजन एवं रचनात्मक प्रस्तुति के उद्देश्य से लिखी गई है। इस कहानी में वर्णित सभी पात्र, स्थान, घटनाएँ, संवाद, परिस्थितियाँ तथा रहस्यमयी, भयावह या अलौकिक प्रसंग लेखक की कल्पना पर आधारित हैं। इनका किसी वास्तविक व्यक्ति, स्थान, संस्था, समुदाय या घटना से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
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