रिपोर्टर :- आर्यन कुमार
गोपालगंज: कुचायकोट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल व्यवस्था पर उठे सवाल, मरीज बोले– दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं, एक्स-रे सेवा भी सीमित हैं
गोपालगंज, बिहार। जिले के कुचायकोट स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चर्चा में है। अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे कई मरीजों और उनके परिजनों ने दवाओं की कमी, डॉक्टरों की उपलब्धता, सीमित एक्स-रे सेवा और मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर गंभीर शिकायतें की हैं। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में मुफ्त इलाज और दवाओं की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों को कई बार निराश होकर लौटना पड़ता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, अस्पताल में ओपीडी तो संचालित होती है, लेकिन कई आवश्यक सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं। इससे खासकर गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को अतिरिक्त आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दवाओं की कमी से मरीज परेशान
अस्पताल में इलाज कराने आए कई मरीजों ने बताया कि डॉक्टर जांच के बाद दवाएं तो लिख देते हैं, लेकिन अस्पताल के दवा काउंटर पर पहुंचने पर केवल कुछ सामान्य दवाएं ही उपलब्ध होती हैं। बाकी दवाएं बाहर की मेडिकल दुकानों से खरीदने की सलाह दी जाती है।
एक मरीज के परिजन ने बताया, "सरकारी अस्पताल इसलिए आते हैं कि यहां मुफ्त इलाज और दवा मिल सके, लेकिन आधी से ज्यादा दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। गरीब परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च उठाना आसान नहीं होता।"
मरीजों का कहना है कि यदि अस्पताल में सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध रहें तो लोगों को निजी मेडिकल दुकानों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा।
ओपीडी और इमरजेंसी की जिम्मेदारी एक ही डॉक्टर पर होने का दावा
अस्पताल पहुंचे लोगों का आरोप है कि कई बार एक ही डॉक्टर को ओपीडी और इमरजेंसी दोनों की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। जब इमरजेंसी में कोई गंभीर मरीज पहुंचता है तो ओपीडी में बैठे मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। वहीं यदि डॉक्टर ओपीडी में व्यस्त रहते हैं तो इमरजेंसी के मरीजों को भी कुछ समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
लोगों का कहना है कि अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने की जरूरत है ताकि दोनों सेवाएं बिना किसी बाधा के संचालित हो सकें।
शौचालय में पानी नहीं होने से बढ़ रही परेशानी
अस्पताल परिसर में बने शौचालयों को लेकर भी मरीजों ने नाराजगी जताई। कई लोगों का कहना है कि शौचालय तो बने हुए हैं, लेकिन उनमें पानी की उचित व्यवस्था नहीं रहती। इससे मरीजों और उनके साथ आए परिजनों को काफी परेशानी होती है।
स्वास्थ्य केंद्र जैसे सार्वजनिक स्थानों पर साफ-सफाई और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था बेहद जरूरी होती है। मरीजों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।
सप्ताह में केवल तीन दिन एक्स-रे होने का आरोप
अस्पताल आए कई लोगों ने बताया कि यहां एक्स-रे की सुविधा सप्ताह में केवल तीन दिन उपलब्ध रहती है। यदि किसी मरीज को अन्य दिनों में एक्स-रे की जरूरत पड़ती है तो उसे बाहर निजी जांच केंद्रों पर भेज दिया जाता है।
ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों का कहना है कि बाहर जांच कराने में समय और पैसे दोनों अधिक खर्च होते हैं। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में प्रतिदिन एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए।
आंख और कान के डॉक्टर बैठते हैं, लेकिन दंत चिकित्सक को लेकर असमंजस
जब अस्पताल में मौजूद लोगों से पूछा गया कि क्या यहां आंख और कान के डॉक्टर भी बैठते हैं, तो कई मरीजों और स्थानीय लोगों ने बताया कि आंख और कान के डॉक्टर अपनी सेवाएं देते हैं।
हालांकि दंत चिकित्सक (डेंटल डॉक्टर) को लेकर लोगों ने अलग शिकायत की। उनका कहना था कि दंत चिकित्सक के आने या न आने की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती। कई बार मरीज दांत का इलाज कराने अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन यह पता ही नहीं चल पाता कि डॉक्टर आए हैं या नहीं। ऐसे में मरीजों को या तो बिना इलाज लौटना पड़ता है या फिर निजी क्लीनिक का रुख करना पड़ता है।
गरीब मरीजों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
कुचायकोट और आसपास के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग इस अस्पताल पर निर्भर हैं। मरीजों का कहना है कि जब दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ें, एक्स-रे निजी केंद्र पर कराना पड़े और कई सेवाओं के लिए इंतजार करना पड़े, तो सरकारी अस्पताल का उद्देश्य प्रभावित होता है।
गरीब परिवारों का कहना है कि वे निजी अस्पतालों का खर्च नहीं उठा सकते, इसलिए सरकारी अस्पताल से बेहतर सुविधाओं की उम्मीद करते हैं।
लोगों ने की व्यवस्था सुधारने की मांग
अस्पताल पहुंचे लोगों ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल में आवश्यक दवाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही डॉक्टरों की पर्याप्त तैनाती, प्रतिदिन एक्स-रे सेवा, शौचालय में पानी की व्यवस्था और दंत चिकित्सक की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए तो हजारों मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष
इस संबंध में अस्पताल प्रशासन का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका। यदि अस्पताल प्रशासन या संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त होती है, तो उसे भी समाचार में प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
निष्कर्ष
कुचायकोट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है। ऐसे में यदि मरीज लगातार दवाओं की कमी, सीमित जांच सुविधा, डॉक्टरों की उपलब्धता और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर शिकायतें कर रहे हैं, तो संबंधित अधिकारियों को इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कदम उठाने चाहिए। बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था हर नागरिक का अधिकार है और सरकारी अस्पतालों की जिम्मेदारी है कि वे आम लोगों को गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएं।
(नोट: यह समाचार अस्पताल में मौजूद मरीजों, उनके परिजनों और स्थानीय लोगों द्वारा दिए गए बयानों पर आधारित है। अस्पताल प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर समाचार को अद्यतन किया जाएगा।)

